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Monday, April 25, 2011

आगाज और अंजाम ! - आकाश सिंह

मेरे पैदा होने की खबर
जब बाप की कानो में पड़ी
तो उनका चेहरा उतर गया
भविष्य का सपना बिखर गया
क्योंकि मैं लड़की थी
घर का माहौल यूं हो गया
जैसे पैदाइश नहीं
कोई मौत हुई है
माँ को भी
लाल के आने का पूरा भरोसा था
मैं लाल नहीं, लाली थी
इशलिये माँ ने भी जी भर कर कोसा था
फिर मुझे बेमन से पाला पोसा गया
मेरे सामने
भाई का जूठन परोसा गया
मैं अपने ही घर में
अजनबी बनकर जीती रही
फिर भी माँ-बाप से मुझे
कोई शिकायत न थी
क्योंकि मैं जानती हूँ
औरत की जिंदगी,
मर्द के आज्ञा पालन में ही कट जाती है |

18 comments:

  1. बेटियों का जन्म एक दुखदाई क्षण होता है हम इसी को सत्य मान कर जी रहें है जबकि यह सबसे बड़ा झूठ है| खुबसूरत अहसास, बधाई

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  2. बहुत सुंदर कविता ! पढ़ कर बेहद दुःख हुआ ! आज भी हमारे समाज में लडकी को अभिशाप ही माना जाता है ..और जो लिखा है वो शातवत सत्य है कई लडकियों के साथ ऐसा होता है ..

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  3. शायद हमें अभी भी इसका एहसास नही है कि अगर बेटियॉ नही होती तो ये संसार ही नही होता। खुबसुरत रचना के लिए बधाई।

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  4. Nice post.
    जनगणन 2011 ने साबित कर दिया है कि लड़कियों के प्रति हमारा समाज कितना बेरहम है ? तक़रीबन 110 बरस पहले 1901 की जनगणना में भारतीय समाज में लड़कियों जो तादाद थी। उससे बेहतर अभी भी नहीं हुई है। साईंस और तकनीक की तरक्क़ी ने बेरहम मां-बाप के हौसलों को इतना बढ़ा दिया है कि अब वे अपनी बच्चियों को दुनिया में आने से पहले ही मां के पेट में क़त्ल कर देते हैं।
    ये बातें हाली पानीपती ट्रस्ट के सेक्रेटरी एडवोकेट राम मोहन राय ने पानीपत में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में बच्चियों का क़त्ल शिक्षित घरानों में हो रहा है। उन्होंने मेवात की मिसाल देते हुए कहा कि दक्षिणी हरियाणा के इस मुस्लिम बहुल ज़िले में स्त्री-पुरूष के अनुपात में बहुत कम अंतर पाया गया है।
    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/04/blog-post_5712.html

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  5. प्रभावित करते भाव...बहुत सुंदर

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  6. आप की कबिता ने प्रभावित किया लड़कियों के जन्म को अभिशाप माना जाता है जबकि सृष्टी की जननी लड़कियां ही है उसके बिना इस संसार की कल्पना नही की जा सकती है आपने इसे शिद्दत से महसूस किया इस भावना के लिए आपको बधाई |
    --------------------------------------------
    यहाँ पधारें --- www.binadanand.blogspot.com

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  7. बहुत खूब दोस्त...
    मा के स्वास्थ के लिये प्रार्थना...

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  8. धार्मिक मुद्दों पर परिचर्चा करने से आप घबराते क्यों है, आप अच्छी तरह जानते हैं बिना बात किये विवाद ख़त्म नहीं होते. धार्मिक चर्चाओ का पहला मंच ,
    यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
    आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये...
    अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
    इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
    हमारा पता है.... hindukiawaz@gmail.com
    समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे
    देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच
    हल्ला बोल

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  9. धार्मिक मुद्दों पर परिचर्चा करने से आप घबराते क्यों है, आप अच्छी तरह जानते हैं बिना बात किये विवाद ख़त्म नहीं होते. धार्मिक चर्चाओ का पहला मंच ,
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    हल्ला बोल

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  10. शातवत सत्य है कई लडकियों के साथ ऐसा होता है ..

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  11. खुबसुरत रचना के लिए बधाई।

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  12. मेरे पैदा होने की खबर
    जब बाप की कानो में पड़ी
    तो उनका चेहरा उतर गया
    भविष्य का सपना बिखर गया
    क्योंकि मैं लड़की थी


    अब क्या कहूँ भाई जी .....!

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  13. बहुत सुंदर प्रभावित करते भाव|धन्यवाद|

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  14. आकाश सिंह जी मुबारक हो बहुत सुन्दर रचना लाली का दर्द दिल को छू गया जो लोग लाली के साथ इस तरह से पेश आते हैं आज इतना चिल्लाने जागरूकता फ़ैलाने के बाद भी वे सच मानव कहलाने के अधिकारी ही नहीं चाहे माँ हो या बाप -
    क्योंकि मैं लड़की थी
    घर का माहौल यूं हो गया
    जैसे पैदाइश नहीं
    कोई मौत हुई है
    उपर्युक्त शब्द न जाने क्यों लोगों के दिल में नहीं चुभते
    आइये अपना सुझाव व् समर्थन के साथ भ्रमर का दर्द और दर्पण में
    धन्यवाद

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  15. अच्छा लिखते हो ...शुभकामनायें !

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  16. nice one yaar hope your writing change someones mind too

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  17. वाह क्या बात है आकाश बहुत खूब
    अरुन (arunsblog.in)

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